Dev Uthani Ekadashi 2026: जानें तिथि, शुभ मुहूर्त,और पूजा विधि

Dev Uthani Ekadashi 2026: कब है एकादशी? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत कथा

Dev Uthani Ekadashi 2026 हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाला पर्व है। यह दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत के लिए समर्पित माना जाता है। देवउठनी एकादशी को देवोत्थान एकादशी और प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं। इसी के साथ चातुर्मास का समापन होता है और मांगलिक कार्यों के लिए शुभ समय की शुरुआत मानी जाती है। इस पावन अवसर पर भक्त भगवान विष्णु की आराधना करते हैं और व्रत रखकर अपने परिवार के कल्याण की कामना करते हैं।

जानें Dev Uthani Ekadashi 2026 की संपूर्ण जानकारी विस्तार में।

देवउठनी एकादशी 2026 कब है? 

हिंदू पंचांग के अनुसार, देवउठनी एकादशी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में स्मार्त परंपरा के अनुसार यह व्रत शुक्रवार, 20 नवंबर 2026 को रखा जाएगा। वहीं, कुछ वैष्णव परंपराओं में एकादशी व्रत शनिवार, 21 नवंबर को रखा जा सकता है। इसलिए व्रत की तारीख तय करते समय अपनी धार्मिक परंपरा और स्थानीय पंचांग का ध्यान रखें।

Dev Uthani Ekadashi 2026 का शुभ मुहूर्त

दिल्ली के पंचांग के अनुसार, देवउठनी एकादशी की तिथि और व्रत पारण का समय इस प्रकार है:

विवरणतारीख और समय
देवउठनी एकादशी (स्मार्त परंपरा)शुक्रवार, 20 नवंबर 2026
एकादशी तिथि प्रारंभ20 नवंबर, सुबह 7:16 बजे
एकादशी तिथि समाप्त21 नवंबर, सुबह 6:32 बजे
व्रत पारण का समय21 नवंबर, दोपहर 1:10 से 3:18 बजे तक

ध्यान दें: ये समय दिल्ली के पंचांग पर आधारित हैं। अलग-अलग पंचांगों में गणना के कारण कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है। वैष्णव परंपरा में व्रत की तारीख और पारण का समय भी अलग हो सकता है। व्रत खोलने से पहले अपने स्थानीय पंचांग में समय की पुष्टि अवश्य करें।

देवउठनी एकादशी क्यों मनाई जाती है?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसके बाद चातुर्मास की अवधि शुरू होती है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी पर भगवान विष्णु के जागने का उत्सव मनाया जाता है। इसी कारण इस दिन को देवउठनी एकादशी कहा जाता है। इस पर्व को भक्ति, संयम और धार्मिक साधना का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जाप और दान-पुण्य करने से आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है। चातुर्मास की समाप्ति के बाद कई समुदायों में विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों का आयोजन भी शुरू हो जाता है।

देवउठनी एकादशी 2026 का धार्मिक महत्व

Dev Uthani Ekadashi 2026 का महत्व भगवान विष्णु की आराधना और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है। इस दिन से संबंधित प्रमुख मान्यताएं निम्नलिखित हैं:

  • भगवान विष्णु का जागरण: भक्त श्रीहरि के योगनिद्रा से जागने की खुशी में पूजा-अर्चना करते हैं।
  • चातुर्मास का समापन: चार महीने की धार्मिक साधना और संयम की अवधि पूरी होती है।
  • मांगलिक कार्यों की शुरुआत: कई समुदायों में इस पर्व के बाद शुभ कार्यों के आयोजन शुरू होते हैं।
  • व्रत और मंत्र जाप: श्रद्धालु उपवास रखते हैं और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करते हैं।
  • दान-पुण्य: जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र और अन्य उपयोगी वस्तुएं दान करने की परंपरा है।

Dev Uthani Ekadashi 2026 की पूजा विधि

देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा घर पर श्रद्धापूर्वक की जा सकती है। पूजा के दौरान स्वच्छता और अपनी पारिवारिक परंपराओं का ध्यान रखें।

1. सुबह स्नान करके पूजा स्थल तैयार करें

प्रातःकाल स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर की सफाई करके भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने पूजा की तैयारी करें।

2. व्रत का संकल्प लें

भगवान विष्णु के सामने हाथ जोड़कर व्रत का संकल्प लें। परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हुए पूजा आरंभ करें।

3. भगवान विष्णु को पूजन सामग्री अर्पित करें

श्रीहरि को फूल, चंदन, धूप, दीप और फल अर्पित करें। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार तुलसी दल भी चढ़ा सकते हैं। इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करके प्रार्थना करें।

4. मंत्र जाप करें और व्रत कथा पढ़ें

इस दिन ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही विष्णु सहस्रनाम का पाठ, भगवद्गीता का अध्ययन या देवउठनी एकादशी की प्रचलित व्रत कथा का श्रवण कर सकते हैं।

5. शाम को आरती करें

संध्या के समय दीपक जलाकर भगवान विष्णु की आरती करें। श्रद्धानुसार भजन-कीर्तन और मंत्र जाप भी कर सकते हैं।

6. अगले दिन व्रत का पारण करें

द्वादशी तिथि पर निर्धारित पारण मुहूर्त में व्रत खोलें। पारण का समय अपनी धार्मिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार निर्धारित करें।

देवउठनी एकादशी व्रत कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी से योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस अवधि को चातुर्मास कहा जाता है। इन चार महीनों में भक्त पूजा-पाठ, जप, तप और दान-पुण्य जैसे धार्मिक कार्य करते हैं। कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी पर भगवान विष्णु के जागने का उत्सव मनाया जाता है। भक्त इस दिन श्रीहरि की पूजा करके परिवार की खुशहाली और संसार की सुख-शांति की प्रार्थना करते हैं।

देवउठनी एकादशी से जुड़ी धार्मिक कथा का पाठ करने और सुनने की परंपरा है। अलग-अलग क्षेत्रों में इस कथा के विभिन्न रूप प्रचलित हैं। श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार कथा का पाठ या श्रवण कर सकते हैं। इस पर्व की मान्यताएं भक्ति, धैर्य और आत्मसंयम का संदेश देती हैं।

देवउठनी एकादशी व्रत में क्या खाएं और किन चीजों से बचें?

एकादशी व्रत के दौरान खान-पान से जुड़े नियम अलग-अलग परंपराओं और व्यक्ति की शारीरिक क्षमता के अनुसार अपनाए जा सकते हैं।

1. व्रत में खाए जाने वाले प्रमुख खाद्य पदार्थ

  • ताजे फल और सूखे मेवे।
  • दूध और अन्य अनुमत दुग्ध उत्पाद।
  • कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से तैयार किए गए व्यंजन।
  • साबूदाना और आलू से बने व्रत के पकवान।

2. व्रत के दौरान सामान्यतः इनसे परहेज किया जाता है

  • चावल, गेहूं और अन्य अनाज।
  • दालें और फलियां।
  • मांसाहारी भोजन और शराब।
  • अपनी धार्मिक परंपरा में निषिद्ध खाद्य पदार्थ।

एकादशी व्रत का उद्देश्य श्रद्धा और संयम है, शरीर को कष्ट देना नहीं। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लें।

देवउठनी एकादशी व्रत का महत्व और लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करने से भक्तों को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं। इस पर्व के प्रमुख संदेश हैं:

  • आत्मसंयम: व्रत और पूजा से अनुशासन की भावना विकसित होती है।
  • मानसिक शांति: मंत्र जाप और ध्यान मन को शांत रखने में सहायक हो सकते हैं।
  • पारिवारिक सद्भाव: सामूहिक पूजा से परिवार की धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है।
  • सेवा और परोपकार: जरूरतमंद लोगों की सहायता करने से दया और सेवा की भावना मजबूत होती है।
  • भक्ति में वृद्धि: भगवान विष्णु की आराधना से अपनी आध्यात्मिक आस्था पर चिंतन करने का अवसर मिलता है।

ये लाभ धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत अनुभवों से जुड़े हैं; इन्हें निश्चित भौतिक परिणामों की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।

निष्कर्ष

Dev Uthani Ekadashi 2026, भगवान विष्णु की भक्ति और चातुर्मास की समाप्ति से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। स्मार्त परंपरा के अनुसार यह व्रत 20 नवंबर 2026 को रखा जाएगा। इस दिन पूजा-पाठ, मंत्र जाप, व्रत कथा और दान-पुण्य करने की परंपरा है। श्रद्धालु अपनी धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय पंचांग के अनुसार व्रत रखकर भगवान विष्णु की आराधना कर सकते हैं। इस पावन पर्व का संदेश श्रद्धा, संयम, सेवा और सद्भाव को अपने जीवन में अपनाना है।

अपनी कुंडली या उससे संबंधित जानकारी के लिए Jyotish Ratan Kendra से संपर्क करें।

JYOTISH RATAN KENDRA

>> Mob No.: +91-8527749889

>> WhatsApp: +91-8527749889

हमारे पास वास्तविक रुद्राक्ष और जेमस्टोन की विस्तृत रेंज है। हम अपने ग्राहकों को उच्चतम गुणवत्ता के उत्पाद और उत्कृष्ट ग्राहक सेवा प्रदान करने पर गर्व करते हैं। हमारी अन्य सेवाओं में यंत्र और कवच, ऑनलाइन पूजा, कुंडली विश्लेषण (जन्म कुंडली तैयार करना और परामर्श), वास्तु ज्योतिष, रत्न और रुद्राक्ष शामिल हैं।

————————————————————————————————–

Celebrities Reviews & Testimonials

Talk to Astrologer