Adhik Maas 2026 कब है? पूरी जानकारी तिथि, महत्व, कथा और नियम

Adhik Maas 2026 कब है? जानें सही तिथि, धार्मिक महत्व, कथा और पालन करने के नियम

अधिक मास हिन्दू धर्म में एक अत्यंत पवित्र और दुर्लभ महीना माना जाता है, जिसे मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। वर्ष 2026 में यह विशेष धार्मिक महत्व के साथ आ रहा है और इसे भगवान विष्णु की उपासना के लिए सबसे श्रेष्ठ समय माना गया है।

यह महीना हर 2 से 3 वर्षों में एक बार आता है और इसका उद्देश्य चंद्र और सौर कैलेंडर के बीच संतुलन बनाना होता है। इस कारण पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिससे धार्मिक गणना सही बनी रहती है।

अधिक मास केवल एक कैलेंडर सुधार नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक साधना और आत्मचिंतन का विशेष अवसर भी है। इस दौरान व्यक्ति अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए भक्ति और संयम का मार्ग अपनाता है।

आइए विस्तार से जानते हैं अधिक मास 2026 की तिथि, महत्व, कथा, नियम, विधि और इससे मिलने वाले लाभ।

जानें Adhik Maas 2026 की संपूर्ण जानकारी विस्तार में।

Adhik Maas क्यों माना जाता है? 

अधिक मास को आध्यात्मिक उन्नति का महीना माना जाता है, जिसमें व्यक्ति सांसारिक गतिविधियों से थोड़ा दूर होकर ईश्वर की भक्ति में लीन होता है। यह समय आत्मशुद्धि और मन की शांति प्राप्त करने का सबसे उत्तम अवसर होता है।

इस दौरान लोग जप, तप, व्रत, ध्यान और दान जैसे कार्यों में अधिक समय बिताते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस महीने में किए गए पुण्य कार्यों का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक मिलता है।

यह महीना व्यक्ति को अपने जीवन के दोषों को पहचानने और उन्हें सुधारने का अवसर देता है। इससे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं और मानसिक संतुलन बना रहता है।

अधिक मास का पालन करने से व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से मजबूत होता है और उसे जीवन में सही दिशा प्राप्त होती है।

Adhik Maas 2026 की तिथि व अवधि

वर्ष 2026 में अधिक मास 17 मई से प्रारंभ होकर 15 जून तक रहेगा, जो लगभग 30 दिनों की पवित्र अवधि मानी जाती है। इस पूरे महीने को धर्म, साधना और आत्मचिंतन के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना का इस समय में अधिक महत्व होता है, और भक्त इस अवधि में नियम, संयम और भक्ति के मार्ग को अपनाने का प्रयास करते हैं। अधिक मास के दौरान आने वाले व्रत और धार्मिक तिथियों का पालन करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। यह समय व्यक्ति को अपने विचार, आचरण और व्यवहार को शुद्ध करने का अवसर प्रदान करता है, जिससे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन संभव हो पाता है।

अधिक मास का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

अधिक मास को भगवान विष्णु का अत्यंत प्रिय महीना माना जाता है, इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। यह समय भक्ति, साधना और पुण्य कर्मों के लिए विशेष रूप से समर्पित होता है। मान्यता है कि इस महीने में किए गए दान, व्रत और पूजा का फल कई गुना बढ़कर मिलता है, जो व्यक्ति के पापों का नाश कर उसे मोक्ष की ओर अग्रसर करता है। इस दौरान मन, वचन और कर्म की शुद्धता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक माना गया है, जिससे आत्मिक शांति और संतुलन प्राप्त होता है। अधिक मास हमें जीवन में संयम, धैर्य और सच्ची भक्ति के महत्व को समझाने का अवसर देता है।

Adhik Maas की कथाक्यों कहते हैं इसे पुरुषोत्तम मास?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, अधिक मास को पहले “मलमास” कहा जाता था और इसे अशुभ माना जाता था। इस कारण कोई भी शुभ कार्य इस महीने में नहीं किया जाता था।

इससे दुखी होकर अधिक मास भगवान विष्णु के पास गया और उनसे सम्मान प्राप्त करने की प्रार्थना की। उसने अपनी उपेक्षा का कारण बताया और अपने अस्तित्व को सार्थक बनाने की इच्छा व्यक्त की। भगवान विष्णु उसकी भक्ति से प्रसन्न हुए और उसे अपना नाम “पुरुषोत्तम” प्रदान किया। इसके बाद यह महीना “पुरुषोत्तम मास” कहलाने लगा और सभी महीनों में श्रेष्ठ माना जाने लगा। तब से इस महीने में किए गए सभी धार्मिक कार्यों का महत्व बढ़ गया और इसे अत्यंत शुभ और पुण्यदायक माना जाने लगा।

अधिक मास में क्या करें (नियम और विधि):

  1. भगवान विष्णु की रोज श्रद्धा से पूजा करें
  2. सुबह स्नान करके दिन की शुरुआत पवित्रता के साथ करें
  3. “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का नियमित जाप करें
  4. गीता, रामायण या भागवत का पाठ करें
  5. अन्न, जल, वस्त्र आदि का दान करें
  6. सात्विक और शुद्ध भोजन ग्रहण करें
  7. जरूरतमंदों की सेवा करें और विनम्र व्यवहार रखें

अधिक मास में क्या नहीं करें:

  1. विवाह जैसे शुभ कार्य न करें
  2. गृह प्रवेश से बचें
  3. नया व्यापार शुरू न करें
  4. मुंडन या अन्य संस्कार न कराएं
  5. तामसिक भोजन और नशे से दूर रहें
  6. क्रोध और झगड़े से बचें
  7. समय की बर्बादी और नकारात्मक आदतों से दूर रहें

Adhik Maas के लाभ:

अधिक मास में किए गए धार्मिक कार्य व्यक्ति के जीवन में गहरा सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं। यह पवित्र महीना आत्मा की शुद्धि, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का विशेष अवसर प्रदान करता है। इस दौरान किए गए व्रत, पूजा और भक्ति से व्यक्ति के पाप क्षीण होते हैं तथा उसके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। भगवान विष्णु की कृपा से सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है, जिससे जीवन में स्थिरता और संतुलन बना रहता है। साथ ही, यह समय आत्मचिंतन और आत्मविकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, जो व्यक्ति को अपने जीवन को बेहतर दिशा में आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है।

Adhik Maas 2026 की सम्पूर्ण जानकारी के लिए देखें यह वीडियो:


निष्कर्ष

अधिक मास 2026 केवल एक अतिरिक्त महीना नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक उन्नति और आत्मशुद्धि का सुनहरा अवसर है। इस दौरान सही नियमों का पालन और भक्ति भाव से की गई पूजा जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाती है। यह महीना हमें भक्ति, संयम और धैर्य का महत्व सिखाता है। इस पवित्र समय का सदुपयोग करके व्यक्ति अपने जीवन को नई दिशा दे सकता है।

अपनी कुंडली या उससे संबंधित जानकारी के लिए Jyotish Ratan Kendra से संपर्क करें।

JYOTISH RATAN KENDRA

>> Mob No.: +91-8527749889

>> WhatsApp: +91-8527749889

हमारे पास वास्तविक रुद्राक्ष और जेमस्टोन की विस्तृत रेंज है। हम अपने ग्राहकों को उच्चतम गुणवत्ता के उत्पाद और उत्कृष्ट ग्राहक सेवा प्रदान करने पर गर्व करते हैं। हमारी अन्य सेवाओं में यंत्र और कवचऑनलाइन पूजाकुंडली विश्लेषण (जन्म कुंडली तैयार करना और परामर्श), वास्तु ज्योतिषरत्न और रुद्राक्ष शामिल हैं।

————————————————————————————————–

Celebrities Reviews & Testimonials

Talk to Astrologer